राज भाषा
 

अंतिम अद्यतन की तिथि : 26.12.2018


केंद्रीय विद्यालय हनुमानगढ़ के अधिकारयों/कर्मचारियों का हिंदी ज्ञान के आधार पर प्रवीण / कार्यसाधकों की सूची : 2018-19
क्रम 
अधिकारी / कर्मचारी का नाम 
पदनाम
कार्यसाधक / प्रवीण
यूनिकोड टंकण प्रशिक्षित
1 श्री बाबूलाल शर्मा (प्र०प्राचार्य) प्राचार्य ग्रेड-II/उप-प्राचार्य   प्रवीणता प्राप्त  -
2 श्री ईश्वर सिंह प्र०स्ना०शि० (गणित) प्रवीणता प्राप्त हाँ
3 श्रीमती हेमलता शर्मा प्र०स्ना०शि० (संस्कृत) प्रवीणता प्राप्त हाँ
4 श्रीमती रीता शर्मा प्र०स्ना०शि० (अंग्रेजी) प्रवीणता प्राप्त हाँ
5 श्री नरेश कुमार  प्र०स्ना०शि० (कार्यानुभव) प्रवीणता प्राप्त हाँ
6 पदरिक्त प्र०स्ना०शि० (शारीरिक शिक्षक) - -
7 सुश्री निरूपा पुस्तकालयाध्यक्ष  प्रवीणता प्राप्त हाँ
8 श्रीधर्मनारायण डाबला  प्राथमिक शिक्षक (संगीत) प्रवीणता प्राप्त हाँ
9 श्रीमती मंजू मीणा प्राथमिक शिक्षिका प्रवीणता प्राप्त हाँ
10 श्री हरिंद्र सिंह प्राथमिक शिक्षक प्रवीणता प्राप्त हाँ
11 श्री महेंद्र सिंह प्राथमिक शिक्षक प्रवीणता प्राप्त हाँ
12 श्री सीता राम  प्राथमिक शिक्षक प्रवीणता प्राप्त हाँ
13 श्रीमती प्रियंका प्राथमिक शिक्षिका प्रवीणता प्राप्त हाँ
14 श्रीमती मनीषा राणा प्राथमिक शिक्षिका प्रवीणता प्राप्त हाँ
15 श्री हंसराज सेतिया वरिष्ठ सचि० सहायक  प्रवीणता प्राप्त हाँ
16 श्री अजय कुमार  कनिष्ठ सचि० सहायक प्रवीणता प्राप्त हाँ
17 श्री शंकर लाल  सब-स्टाफ प्रवीणता प्राप्त हाँ
18 श्री विजय देव शर्मा  सब-स्टाफ प्रवीणता प्राप्त हाँ

राजभाषा हिंदी से सम्बंधित कुछ संवैधानिक परिभाषाएं

हिंदी का कार्यसाधक का ज्ञान –

  1. यदि किसी कर्मचारी  ने मेट्रिक परीक्षा (दसवीं) या इसके समक्ष या उससे उच्चतर परीक्षा हिंदी विषय के साथ उत्तीर्ण की है |
  2. अथवा हिंदी शिक्षण योजना के अंतर्गत प्रज्ञा परीक्षा उत्तीर्ण की है , अथवा
  3. यदि कर्मचारी यह घोषणा करदे की वह हिंदी में कार्य करने में सक्षम है , तो यह समझा जायेगा की कर्मचारी को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त है |

हिंदी में प्रवीणता प्राप्त –

  1. यदि किसी कर्मचारी  ने मेट्रिक परीक्षा (दसवीं) या इसके समक्ष या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण की है अथवा
  2. स्नातक परीक्षा या इसके समकक्ष किसी अन्य परीक्षा में हिंदी को एक वैकल्पिक विषय के रूप में लिया है, अथवा
  3. यदि कर्मचारी यह घोषणा करदे की उसे हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है तो यह समझा जायेगा की कर्मचारी को हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है |

विद्यालय राजभाषा कार्यान्वयन समिति 

                    भारत सरकार के सभी कार्यालयों , उपक्रमों , बैंकों आदि में राजभाषा कार्यान्वयन को सुचारू , सुनियोजित और सुन्दर ढंग से संचालित करने के लिए राजभाषा कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है | इस समिति का गठन प्रत्येक कार्यालय , शाखा आदि में अनिवार्य है | इस समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार अवश्य आयोजित की जानी चाहिए | सामान्यता अप्रैल –जून , जुलाई-सितम्बर , अक्टूबर-दिसंबर तथा जनवरी –मार्च की कुल चार तिमाहियो में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की चार बैठको आयोजित की जाती है |

केंद्रीय विद्यालय हनुमानगढ़ के राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्यगण

 क्रमांक 
सदस्यों के नाम 
पद 
1
श्री बाबूलाल शर्मा 
अध्यक्ष,वि०रा०क्रि०समिति
2
श्रीमती हेमलता शर्मा
सचिव,वि०रा०क्रि०समिति
3
  श्रीमती रीता शर्मा
   सदस्य,वि०रा०क्रि०समिति
4
सुश्री निरूपा
सदस्य,वि०रा०क्रि०समिति
5
श्री हंसराज सेतिया
सदस्य,वि०रा०क्रि०समिति
6
श्री अजय कुमार 
सदस्य,वि०रा०क्रि०समिति 


केंद्रीय विद्यालय हनुमानगढ़ की  अब तक की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठकों की जानकारी

वर्ष 2015-16 में तिमाही बैठके
क्रमांक  तिमाही बैठक  दिनांक 
1 जुलाई – सितम्बर 16/09/2015
2 अक्टूबर – दिसंबर 30/12/2015 
3 जनवरी –मार्च 15/03/2016 
वर्ष 2016-17 में तिमाही बैठके
1 अप्रैल – जून 25/06/2016 
2 जुलाई – सितम्बर 14/09/2016 
3 अक्टूबर –दिसंबर 22/12/2016 
4 जनवरी –मार्च 13/01/2017
वर्ष 2017-18 में तिमाही बैठके
1 अप्रैल – जून 03/04/2017
2 जुलाई – सितम्बर 07/07/2017  
3 अक्टूबर-दिसम्बर 13/10/2017
4 जनवरी-मार्च 18/01/2018
वर्ष 2018-19 में तिमाही बैठके
1 अप्रैल – जून 07/04/2018
2 जुलाई – सितम्बर 05/07/2018
3 अक्टूबर-दिसम्बर 06/10/2018
4 जनवरी-मार्च

 

 

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति

“नराकास” का गठन: राजभाषा विभाग के दिनांक 22.11.1976 के  का .ज्ञा.सं. 1/14011/12/76-रा.भा.(क-1) के अनुसार देश के उप सभी नगरों में जहां केन्द्रीय सरकार के 10 या इससे अधिक कार्यालय हों , नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियो का गठन किया जाता है| समिति का गठन राजभाषा विभाग के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालयों से प्राप्त प्रस्तावों के अधर पर भारत सरकार के सचिव (राजभाषा) की अनुमति से किया जाता है | इन समितियों की अध्यक्षता नगर विशेष में स्थित केन्द्रीय सर्कार के कार्यालयों / उपक्रमों / बैंको आदि के वरिष्ठतम अधिकारियो में से किसी एक के द्वारा की जाती है | अध्यक्ष को राजभाषा विभाग द्वारा नामित किया जाता है | इन समितियों की वर्ष में दो छमाही बैठके आयोजित की जाती है, जिनमे केंद्र सरकार के प्रत्येक कार्यालय द्वारा भाग लिया जाना अनिवार्य है |

क्रमांक अध्यक्ष, नराकास हनुमानगढ़ विद्यालय की ओर से नामित सदस्य नराकास  बैठक की तिथि
1. श्री एम. एस. राजपुरोहित, सहायक महाप्रबंधक श्री बाबूलाल शर्मा, प्रभारी प्राचार्य  20/08/2018
    श्रीमती हेमलता शर्मा, सदस्य 29/11/2018

 

संसदीय राजभाषा समिति

            संसदीय राजभाषा समिति का गठन राजभाषा अधिनियम , 1963 की धरा 4 क तहत वर्ष 1976 में किया गया | कुल 30 सदस्यों इस समिति में 20 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से निर्वाचित होते है | संसदीय राजभाषा समिति की 03 उपसमितिया होती है, जिनमे प्रत्येक में 10 -10 सदस्य होते है | संसदीय राजभाषा समिति की पहली उपसमिति शिक्षा संस्थानों का निरिक्षन करती  है | संसदीय समिति का कर्तव्य संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में की गई प्रगति का पुन: अवलोकन कर उस पर सिफारिशें करते हुए माननीय राष्ट्रपति जी को प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होता है |


हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम 2018

   विद्यालय में  01/09/2018  से 15/09/2018  तक हिदी पखवाड़े का आयोजन किया गया | जिसके अंतर्गत विद्यालय कर्मचारियों हेतु निम्नलिखित प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी | विजेता प्रतिभागियों के नाम इस प्रकार है -

क्रमांक प्रतियोगिता विजेता प्रतिभागियों के नाम
1. प्रशासनिक शब्दावली परीक्षा

प्रथम- श्री अजय कुमार, 

द्वितीय- सुश्री निरूपा

2. हिंदी भाषण प्रतियोगिता

प्रथम-श्री नरेश कुमार

द्वितीय-श्रीमती ममता गोस्वामी

तृतीय-सुश्री निरूपा

3. हिंदी कविता पाठ प्रतियोगिता

प्रथम-श्री महेंद्र सिंह

द्वितीय-श्रीमती मंजू मीणा

तृतीय-श्रीमती रीता शर्मा

4. हिंदी सुलेखन प्रतियोगिता

प्रथम-श्रीमती मनीषा राणा

द्वितीय-श्री महेंद्र सिंह

तृतीय-श्रीमती ममता गोस्वामी

5. गीत-गायन प्रतियोगिता

प्रथम- श्री धर्म नारायण डाबला

द्वितीय-श्रीमती हेमलता शर्मा

तृतीय-श्री महेंद्र सिंह

6. हिंदी यूनिकोड टंकण गति परिक्षण

प्रथम-श्री अजय कुमार

द्वितीय-श्री महेंद्र सिंह

तृतीय-श्रीमती मनीषा राणा

   

हिंदी कार्यशाला
  1. एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला:-                                                                  

विषय :    यूनिकोड (UNICODE) टंकण प्रशिक्षण कार्यशाला

               यूनिकोड  को कंप्यूटर  में इनस्टॉल करना सिखाया गया |

                हिंदी के कुछ कठिन शब्दों को उदाहरण द्वारा समझाया गया |

                 यूनिकोड टंकण पर आधारित टंकण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया |

 

  1. एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला:-                                                         

विषय : देवनागरी लिपि एवं हिंदी वर्तनी |

            हिंदी कार्यशाला के आयोजन का मुख्य उदेश्य  सभी शिक्षको को  सामान्य हिंदी तथा हिंदी के उस प्रयोग को  समझाना है जिसमे सामान्यतया त्रुटि होती है | अनुस्वार  , विसर्ग  , अनुनासिक चिन्हों को उदाहरण सहित बताया गया |

भारतीय अंको के अंतराष्ट्रीय स्वरुप तथा देवनागरी स्वरुप के विषय में भी बताया गया | मूल व्यंजन , उनका उपचरण स्थल , संयुक्त व्यंजन के विषय में भी जानकारी दी गयी |

              हिंदी भाषा प्रचलित अन्य विदेशी भाषाओ के शब्दों पर भी विचार किया गया | हिंदी में कुछ शब्द ऐसे है जिनके  दो –दो  रूप बराबर चल रहे हें इसे उद्धरण द्वारा स्पष्ट किया गया | हिंदी लिखते समय शिरो रेखा का प्रयोग करना चाहिए| इस प्रकार इस कार्यशाला में सभी ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया |

यूनिकोड एक परिचय  एवं आवश्यकता

यूनिकोड (Unicode), प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष संख्या प्रदान करता है, चाहे कोई भी कम्प्यूटर प्लेटफॉर्म, प्रोग्राम अथवा कोई भी भाषा हो। यूनिकोड स्टैंडर्ड को एपलएच.पी.आई.बी.एम.जस्ट सिस्टममाइक्रोसॉफ्टऑरेकलसैपसन, साईबेस, यूनिसिस जैसी उद्योग की प्रमुख कम्पनियों और कई अन्य ने अपनाया है। यूनिकोड की आवश्यकता आधुनिक मानदंडों, जैसे एक्स.एम.एलजावा, एकमा स्क्रिप्ट (जावास्क्रिप्ट), एल.डी.ए.पी., कोर्बा 3.0डब्ल्यू.एम.एल के लिए होती है और यह आई.एस.ओ/आई.ई.सी. 10646 को लागू करने का अधिकारिक तरीका है। यह कई संचालन प्रणालियों, सभी आधुनिक ब्राउजरों और कई अन्य उत्पादों में होता है। यूनिकोड स्टैंडर्ड की उत्पति और इसके सहायक उपकरणों की उपलब्धता, हाल ही के अति महत्वपूर्ण विश्वव्यापी सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी रुझानों में से हैं।

यूनिकोड को ग्राहक-सर्वर अथवा बहु-आयामी उपकरणों और वेबसाइटों में शामिल करने से, परंपरागत उपकरणों के प्रयोग की अपेक्षा खर्च में अत्यधिक बचत होती है। यूनिकोड से एक ऐसा अकेला सॉफ्टवेयर उत्पाद अथवा अकेला वेबसाइट मिल जाता है, जिसे री-इंजीनियरिंग के बिना विभिन्न प्लेटफॉर्मों, भाषाओं और देशों में उपयोग किया जा सकता है। इससे आँकड़ों को बिना किसी बाधा के विभिन्न प्रणालियों से होकर ले जाया जा सकता है।

यूनिकोड क्या है?

यूनिकोड प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष नम्बर प्रदान करता है,

·         चाहे कोई भी प्लैटफॉर्म हो,

·         चाहे कोई भी प्रोग्राम हो,

·         चाहे कोई भी भाषा हो।

कम्प्यूटर, मूल रूप से, नंबरों से सम्बंध रखते हैं। ये प्रत्येक अक्षर और वर्ण के लिए एक नंबर निर्धारित करके अक्षर और वर्ण संग्रहित करते हैं। यूनिकोड का आविष्कार होने से पहले, ऐसे नंबर देने के लिए सैंकडों विभिन्न संकेत लिपि प्रणालियां थीं। किसी एक संकेत लिपि में पर्याप्त अक्षर नहीं हो सकते हैं : उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ को अकेले ही, अपनी सभी भाषाओं को कवर करने के लिए अनेक विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है। अंग्रेजी जैसी भाषा के लिए भी, सभी अक्षरों, विरामचिन्हों और सामान्य प्रयोग के तकनीकी प्रतीकों हेतु एक ही संकेत लिपि पर्याप्त नहीं थी।

ये संकेत लिपि प्रणालियां परस्पर विरोधी भी हैं। इसीलिए, दो संकेत लिपियां दो विभिन्न अक्षरों के लिए, एक ही नंबर प्रयोग कर सकती हैं, अथवा समान अक्षर के लिए विभिन्न नम्बरों का प्रयोग कर सकती हैं। किसी भी कम्प्यूटर (विशेष रूप से सर्वर) को विभिन्न संकेत लिपियां संभालनी पड़ती है; फिर भी जब दो विभिन्न संकेत लिपियों अथवा प्लेटफॉर्मों के बीच डाटा भेजा जाता है तो उस डाटा के हमेशा खराब होने का जोखिम रहता है।यूनिकोड से यह सब कुछ बदल रहा है!

यूनिकोड की विशेषताएँ-

·         (१) यह विश्व की सभी लिपियों से सभी संकेतों के लिए एक अलग कोड बिन्दु प्रदान करता है।

·         (२) यह वर्णों (कैरेक्टर्स) को एक कोड देता है, न कि ग्लिफ (glyph) को।

·         (३) जहाँ भी सम्भव यूनिकोड होता है, यह भाषाओं का एकीकरण करने का प्रयत्न करता है। इसी नीति के तहत सभी पश्चिम यूरोपीय भाषाओं को लैटिन के अन्तर्गत समाहित किया गया है; सभी स्लाविक भाषाओं को सिरिलिक (Cyrilic) के अन्तर्गत रखा गया है; हिन्दी, संस्कृत, मराठी, नेपाली, सिन्धी, कश्मीरी आदि के लिए 'देवनागरी' नाम से एक ही ब्लॉक दिया गया है; चीनी, जापानी, कोरियाई, वियतनामी भाषाओं को 'युनिहान्' (UniHan) नाम से एक ब्लॉक में रखा गया है; अरबी, फारसी, उर्दू आदि को एक ही ब्लॉक में रखा गया है।

·         (४) बाएँ से दाएँ लिखी जाने वाली लिपियों के अतिरिक्त दाएँ-से-बाएँ लिखी जाने वाली लिपियों (अरबी, हिब्रू आदि) को भी इसमें शामिल किया गया है। उपर से नीचे की तरफ लिखी जाने वाली लिपियों का अभी अध्ययन किया जा रहा है।

·         (५) यह ध्यान रखना जरूरी है कि यूनिकोड केवल एक कोड-सारणी है। इन लिपियों को लिखने/पढ़ने के लिए इनपुट मेथड एडिटर और फॉण्ट-फाइलें जरूरी हैं।

यूनिकोड का महत्व और लाभ-

एक ही दस्तावेज में अनेकों भाषाओं के टेक्स्ट लिखे जा सकते है।

·         टेक्स्ट को केवल एक निश्चित तरीके से संस्कारित करने की जरूरत पड़ती है जिससे विकास-खर्च एवं अन्य खर्चे कम लगते हैं।

·         किसी सॉफ्टवेयर-उत्पाद का एक ही संस्करण पूरे विश्व में चलाया जा सकता है। क्षेत्रीय बाजारों के लिए अलग से संस्करण निकालने की जरूरत नहीं पड़ती

·         किसी भी भाषा का टेक्स्ट पूरे संसार में बिना भ्रष्ट हुए चल जाता है। पहले इस तरह की बहुत समस्याये आती थीं।

 
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